RPSC School Lecturer Rajasthani Syllabus

इस पोस्ट में राजस्थान लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित स्कूल व्याख्याता भर्ती परीक्षा राजस्थानी विषय का पाठ्यक्रम एवं परीक्षा पैटर्न उपलब्ध करवाया गया है। यह पाठ्यक्रम और परीक्षा पैटर्न हिन्दी व अंग्रेजी दोनों भाषाओं मे उपलब्ध करवाया गया है। यदि आप राजस्थान स्कूल व्याख्याता भर्ती परीक्षा की तैयारी कर रहे है तो यह पोस्ट आपके लिए बेहद ही उपयोगी एवं महत्वपूर्ण है। इस पोस्ट में राजस्थानी विषय के पाठ्यक्रम और परीक्षा पैटर्न से संबंधित सम्पूर्ण जानकारी उपलब्ध करवाई गई है। RPSC School Lecturer Rajasthani Syllabus, RPSC School Lecturer Rajasthani Exam Pattern, RPSC 1st grade Rajasthani syllabus, rajasthani school lecturer syllabus, rajasthani 1st grade syllabus

RPSC School Lecturer Rajasthani Syllabus
Exam OrganizerRajasthan Public Service Commission
Exam NameRPSC School Lecturer
CategorySyllabus
PaperPaper – II Rajasthani
Official Websiterpsc.rajasthan.gov.in
India GK Zone HomeIndiaGKZone.com

RPSC School Lecturer Rajasthani Exam Pattern

1. पेपर में सभी प्रश्न बहुविकल्पीय प्रकार के प्रश्न होंगे।
2. उत्तर के मूल्यांकन में नकारात्मक अंकन लागू होगा। प्रत्येक गलत उत्तर के लिए उस विशेष प्रश्न के लिए निर्धारित अंकों में से एक तिहाई अंक काटे जाएंगे।
3. लिखित परीक्षा 3 घंटे की होगी।

SubjectNo. of QuestionsTotal Marks
Knowledge of Subject Concerned : Senior Secondary Level55110
Knowledge of Subject Concerned : Graduation Level55110
Knowledge of Subject Concerned : Post Graduation Level1020
Educational Psychology, Pedagogy, Teaching Learning Material, Use of Computers and Information Technology in Teaching Learning.3060
Total150300

RPSC School Lecturer Rajasthani Syllabus

खण्ड-I (उच्च माध्यमिक स्तर)

1. राजस्थानी भाषा:-
 उद्भव एवं विकास
 राजस्थानी की विभिन्न बोलियाँ, क्षेत्र एवं विशेषताएँ
 राजस्थानी एक स्वतंत्र भाषाः भाषा वैज्ञानिक तत्व
 प्रमुख लिपियांः मुड़िया एवं देवनागरी

2. राजस्थानी भाषा, व्याकरण एवं काव्य-दोष:-
 राजस्थानी वर्णमाला
 संज्ञा, सर्वनाम, क्रिया संरचना
 राजस्थानी भाषा की विशिष्ट ध्वनियां, शब्दों के परिवर्तित रूप एवं अर्थ भेद।
 पर्यायवाची शब्दः तलवार, घोड़ा, ऊंट, पानी, वीर, सूर्य, हाथी, कमल, बादल, भूमि।
 अलंकार: वैण-सगाई और उसके भेद
 छंदः दूहा छंद और उसके भेद
 काव्यदोष: अंधदोष, छबकाल, पांगलो, हीन और निनंग
 शब्दशक्तियां: अभिद्या, लक्षणा, व्यंजना।

खंड – II (स्नातक स्तर)

3. राजस्थानी साहित्य का कालगात अध्ययन:-
(I) आदिकाल:
परिस्थितियां, साहित्यिक प्रवृत्तियां, प्रमुख रचनाकारः वज्रसेन सूरि, श्रीधर
व्यास, बादरदाढी, शारंगधर, शिवदास गाडण, नरपति नाल्ह।
(II) मध्यकाल:-
(अ) पूर्वमध्यकालः परिस्थितियां, साहित्यिक प्रवृत्तियां, प्रमुख रचनाकारः ईसरदास, दूरसा
आढ़ा, पृथ्वीराज राठौड़, हेमरतन सूरि, माधोदास दधवाड़िया, सायांजी झूला
(ब) उत्तरमध्यकालः परिस्थितियां, साहित्यिक प्रवृत्तियां –
प्रमुख रचनाकारः मीरांबाई, दादूदयाल, सुंदरदास, जांभोजी, जसनाथजी, रामचरणदास,
सहजोबाई, गवरीबाई, किसना आढ़ा, मुहणोत नैणसी, नरहरिदास बारहठ, कृपाराम खिड़िया
और बांकीदास।
(III) आधुनिक काल – परिस्थितियां, साहित्यिक प्रवृत्तियां,
प्रमुख रचनाकार:-
(पद्य): सूर्यमल्ल मीसण, रामनाथ कविया, शंकरदान सामौर, केसरीसिंह बारहठ, महाराज
चतुरसिंह, गणेषीलाल व्यास ‘उस्ताद’, कन्हैयालाल सेठिया, चन्द्रसिंह ‘बिरकाली’, नारायणसिंह
भाटी, सत्यप्रकाष जोषी, गिरधारी सिंह पड़िहार।
(गद्य): षिवचन्द्र भरतिया, मुरलीधर व्यास, सूर्यकरण पारीक, गिरधारीलाल शास्त्री, डॉ नेमनारायण जोषी, डॉ. मनोहर शर्मा, डॉ. नृसिंह राजपुरोहित सांवर दइया, यादवेन्द्र शर्मा ‘चन्द्र’, गोविन्दलाल माथुर, अन्नाराम सुदामा, लक्ष्मीकुमारी चूंडावत, विजयदान देथा, बैजनाथ पंवार, करणीदान बारहठ, जहूर खां मेहर, अर्जुनदेव चारण।

4. राजस्थानी पद्य एवं गद्यः रूप-परम्परा:-

पद्य: रासो, वेलि, फागु, चौपाई, प्रवाड़ा संधि, बारहमासा, विवाहलो, धमाल, चैत्यपरिपाटी,
नीसांणी, गीत एवं सतसई।
गद्य: वचनिका, दवावैत, ख्यात, वात, विगत, वंषावली, गुर्वावली, बालावबोध, टीका एवं टब्बा।
आधुनिक विधाएं – कहानी, उपन्यास, नाटक, एकांकी, निबंध, संस्मरण।

खंड – III स्नातकोत्तर स्तर

5. राजस्थानी लोक साहित्य एवं संस्कृति:-
 लोक गीत, लोक कथा, लोक गाथा, लोक नाट्य, लोकोक्ति (कहावते एवं मुहावरे)
 लोकदेवी-देवता, लोक उत्सव, (मेले, पर्व एवं तीज त्यौहार)
 लोक कला- (मांडणे एवं सांझी)

6. राजस्थानी काव्य शास्त्र:-
 साहित्य का स्वरूप एवं विवेचन
 रस सि़द्धांतः रसनिष्पत्ति, साधारणीकरण
 ध्वनिसिद्धांत एवं वक्रोक्ति सिद्धान्त

खण्ड IV – शैक्षिक मनोविज्ञान, शिक्षाशास्त्र, शिक्षण-अधिगम सामग्री, कम्प्यूटर एवं सूचना तकनीकी का शिक्षण-अधिगम में उपयोग

1. शिक्षण-अधिगम में मनोविज्ञान का महत्व:
● अधिगमकर्ता
● शिक्षक
● शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया
● विद्यालय प्रभावशीलता

2. अधिगमकर्ता का विकास: किशोर अधिगमकर्ता में
● संज्ञानात्मक, शारीरिक, सामाजिक संवेगात्मक एवं नैतिक विकास के प्रतिमान (Patterns) एवं वैशिष्ट्य (characteristics).

3. शिक्षण-अधिगम:
● उच्च माध्यमिक विद्यालयों के विद्यार्थियों के लिए – व्यवहारवादी, संज्ञानवादी और निर्मितिवादी (constructivist) सम्प्रत्यय, अधिगम के सिद्धान्त एवं इनके निहितार्थ।
● किशोर अधिगमकर्ता की अधिगमकर्ता की अधिगम-विशेषताएँ एवं इनके शिक्षण के लिए निहितार्थ।

4. किशोर – अधिगमकर्ता प्रबंधन:
● मानसिक -स्वास्थ्य एवं समायोजन -समस्याओं का सम्प्रत्यय
● किशोर के मानसिक स्वास्थ्य के लिए संवेगात्मक -बु़िद्ध एवं इसके निहितार्थ।
● किशोर के मानसिक स्वास्थ्य को प्रोत्साहित (परिपोषित) करने की मार्गदर्शक प्रविधियों का उपयोग

5. किशोर -अधिगमकर्त्ता के लिए अनुदेशनात्मक व्यूहरचनाएँ:
● सम्प्रेषण कौशल एवं इसके उपयोग।
● शिक्षण की अवधि में, शिक्षण-अधिगम सामग्री का आयोजन एवं उपयोग।
● शिक्षण -प्रतिमान- अग्रिम संगठन, वैज्ञानिक-पृच्छा (enquiry), सूचना, प्रक्रम (processing), सहकारी अधिगम (cooperative).
● शिक्षण- आधारित निर्मितिवादी- सिद्धान्त (constructivist principles).

6. सूचना सम्प्रेषण तकनीकी शिक्षाशास्त्र समाकलन:
● सूचना सम्प्रेषण तकनीकी (ICT) का सम्प्रत्यय
● हार्डवेयर (hardware) एवं सॉफ्टवेयर (software) का सम्प्रत्यय
● प्रणाली-उपगाम से अनुदेशन
● कम्प्यूटर सहायता प्राप्त अधिगम (CAL)
● कम्प्यूटर सहायता प्राप्त अनुदेशन (CAI)
● आई.सी.टी. शिक्षाशास्त्र समाकलन को प्रभावित करने वाले कारक।

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